शनिवार, 12 दिसंबर 2015

मोदी जी को पत्र : तेल का खेल

सेवा में,
श्री मान नरेंद्र दामोदर दास मोदी
प्रधानमंत्री भारत

विषय : - तेल का खेल

महोदय, मैं भारत का एक आम नागरिक की हैसियत से आप से गुहार लगा रहा हूँ कि देश मे तेल (पेट्रोलियम) के दाम अभी भी बहुत अधिक है जो कि आम आदमी का तेल खूब कस के निकाल रहा है ! तेल की खरीद और बिक्री की एक तुलनात्मक अध्ययन नीचे की श्रेणी मे हैं :

13-Nov 102.58 14-Nov 76.96 In Delhi Diesel Rate  Petrol Rate
13-Dec 105.49 14-Dec 60.55 13-Dec 53.78 71.52
14-Jan 102.25 15-Jan 47.45 15-Dec 46.55 60.48
14-Feb 104.82 15-Feb 54.93      
14-Mar 104.04 15-Mar 52.83 Dollar Conversion Rate
14-Apr 104.94 15-Apr 57.42 13-Dec   61.82
14-May 105.73 15-May 62.5 15-Dec   67.15
14-Jun 108.37 15-Jun 61.3      
14-Jul 105.22 15-Jul 54.43 Oil Rate per Barrel (In INR)
14-Aug 100.05 15-Aug 45.72 Dec-13   6521.392
14-Sep 95.89 15-Sep 46.29 Dec-15   2547.00
14-Oct 86.13 15-Oct 46.96      


अगर हम देखें तो कि क्रूड तेल की कीमत दिसंबर 2013 मे 105.49 डॉलर प्रति बैरल था और वर्तमान मे (दिसंबर 2015) मे WTI Crude Oil की कीमत प्रति बैरल $35.62 Brent Crude Oil की कीमत प्रति बैरल $37.93 (Saturday 12, 2015) (Sources: http://www.oil-price.net/ ) है , यदि इसे हम 40 डॉलर भी मान कर गणना करे तो तेल की कीमतों मे दिसंबर 2013 और दिसंबर 2015 के दामों मे भारी गिरावट आई है ! डॉलर के दाम दिसंबर 2013 मे 61.82 रुपये था तो वर्तमान मे 67.15 रुपये ! इस हिसाब से दिसंबर 13 के मुकाबले दिसंबर 2015 मे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों मे 58.81% की गिरावट आई है ! लेकिन भारतीय खुदरा बाज़ार मे तेलों की कीमत मे महज 15.44% पेट्रोल और 13.44% डीज़ल की गिरावट आई है ! डीज़ल और पेट्रोल की कीमतों का प्रभाव सब पर पड़ता है , क्या आम और क्या खास ! किसानी तो पूरी तरह डीज़ल पर ही निर्भर है ! खेतों की जुताई, सिचाई और मड़ाई, संरक्षण और वितरण ! खेती करने वाले से लेकर उपभोक्ता सब पर असर पड़ता है ! फ़ैक्टरियों मे (जहाँ बिजली नहीं है) मशीने डीज़ल से चलती हैं जिनका प्रभाव उनके उत्पादन कीमत पर पड़ता है ! रेल से लेकर बस तक के किरायों पर भी अनावश्यक रूप से वृद्धि होती है !

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि आप पेट्रोलियम मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी को निर्देश दीजिए कि डीज़ल और पेट्रोल की कीमतों मे भी सुधार करें !

इस आशा के साथ कि हमारे प्रधानमंत्री जी इस पत्र पर ज़रूर गौर फरमाएँगे,

आपका

एक आम नागरिक

मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

आफ़त की मारी कॉंग्रेस बेचारी

GST पास कराने की भाजपा की कोशिश नाकाम हो सकती है या यूँ भी कह सकते है भाजपा नाकाम कोशिश कर रही है ! क्योंकि राहुल गाँधी हमेशा से ही कहते आ रहे हैं कि भाजपा कोई भी काम चुपके चुपके कर लेती है हमसे सलाह भी नही करती ! अगर भाजपा सलाह लेती तो सबसे पहले यही सलाह देते कि सुब्रमण्यम स्वामी को रोको, उसे बोलो कि शांति से बैठ कर बुढ़ापे का मज़ा लो उंगली करना बंद करो ! ना जाने क्या सूझी रहती है इस आदमी को , जब देखो पीछे ही पड़ा रहता है ! कभी नागरिकता पर प्रश्न खड़ा कर देता है तो कभी नेशनल हेरॉल्ड को लेकर ! इन दोनो ही मुद्दों हमने आम आदमी का कुछ भी नुकसान नहीं किया , और जिनमे कुछ किया है उस मामले आप हमारा कुछ कर नही पा रहे ! आख़िर जनता को और दुनिया को आपको भी तो कुछ जवाब देना ! घूम घूम कर दुनिया भर मे कहते फिर रहे हैं कि हम सुधार कर रहे हैं , कुछ नही कर पाओगे ! इस लिए अगर पास कराना है तो कुछ हमारा सहयोग कीजिए और फिर हम आपका सहयोग करेंगे ! इसे चाहे तो आप व्यापारिक भाषा BARTER SYSTEM मे कह लें या फिर सामाजिक भाषा मे GIVE AND TAKE ! लेकिन सरकार ने अपने स्तर पर सहमति बनाने ले किए  मेलजोल बढ़ाने लगे ! नेहरू जी की प्रशंसा से लेकर सोनिया जी तक की प्रशंसा की , मनमोहन जी और सोनिया जी चाय पर भी बुलाया ! अंबेडकर जी की विरासत को हड़पने की कोशिश भी हुई , मगर कॉंग्रेस ने भी बता दिया कि अंबेडकर जी और भारतीय संविधान मे गैर भाजपाई लोगों का ही योगदान है ! क्योंकि RSS की भारतीय संविधान मे आस्था नही थी इसीलिए उनका कोई नैतिक हक़ नहीं बनता अंबेडकर की विरासत पर अधिकार जताने का ! फिर भाजपा इस बात का भी समुचित जवाब नहीं दे पाई कि जब देश 26 जनवरी को सेलिब्रेट करता ही है तो फिर 26 नवंबर क्यों ? क्या अंबेडकर को नेहरू पर तरजीह देने की कोशिश कर रही है सरकार ! आख़िर सरकार उन लोगों को जगाने की कोशिश क्यों कर रही है जिन्हें कॉंग्रेस ने नेहरू और गाँधी जी की छाया मे इतिहास के कोनो मे छुपा दिया था ! खैर .... राजनीति है आम आदमी की समझ मे नही आएगा !
समझ मे तो कॉंग्रेस के भी नही आ रहा कि एक सप्ताह पहले संसद मे जिन अंबेडकर के संविधान पर कॉंग्रेस को इतना गर्व था , आज उसी पर इतना गुस्सा क्यों आ रहा है ! अगर नेशनल हेराल्ड केस मे कुछ हुआ है तो उसी क़ानून के दायरे मे हुआ , उसी संविधान की न्याय प्रणाली के अंतर्गत हुआ ! कैप्टन अभिमन्यु यह तो कहते हैं कि अंबेडकर जी ने दुनिया का सबसे अच्छासंविधान देश को दिया ! लेकिन उसी की न्याय प्रकिया की प्रतिक्रिया स्वरूप कॉंग्रेससंसद को ठप कर देती है !

हमने तो 6वीं कक्षा ने ही पढ़ना शुरू कर दिया था कि ALL ARE EQUAL BEFORE LAW, लेकिन यह सच्चाई से कोसों दूर है ! क्योंकि राहुल और सोनिया गाँधी की याचिका खारिज होने के बाद संसद का यह हाल है तो कल्पना कीजिए कि तब संसद को क्या हाल होगा जब सोनिया जी के दामाद श्री वाड्रा जी से पूछताछ शुरू होगी ! क्योंकि हरियाणा में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा गुड़गांव केचार गांवों में डेवलपर्स के लिए लाइसेंस देने में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहेन्यायमूर्ति एसएन ढींगरा आयोग,रॉबर्ट वाड्रा , कांग्रेसअध्यक्ष सोनिया गांधी केदामाद को अगले साल कीशुरुआत में लिए बुलाने को तैयार है।


मेरी तो सलाह यही है कि रहीं जी को याद कीजिए और इंतजार कीजिए :-
रहींमन चुप ह्वे बैठिए , देख दीनन कर फेर ! जब नीके दिन आइ हैं बनत ना लगीहे बेर !!

गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

पत्रकारों कितना नीचे गिरोगे भाई !

24x7 चैनलों के हो जाने से खबरों का अकाल पद गया है, उन्हें समझ मे ही नही आता की दिन भर के खुली हुई दुकान पर क्या क्या दिखाएँ ! तोते उड़ाना, कौवा लड़ाना, किसी बयान को तोड़ मरोड़ कर लंबा खींच देना , अर्थ का अनर्थ बना देना !


लेकिन आज जो किया वह बहुत ही असंवेदनशील था ! चेन्नई बाढ़ मे फँसे लोगों तक सहायता पहुँचा रहे नेवी के ऑफिसर्स की निष्ठा पर ही सवाल उठा दिया, एक पत्रकार ने नेवी चीफ़ से ही पूछ दिया नेवी में भी 'असहिष्णुता' फील हो रही है कि नहीं ! इसके उत्तर मे नेवी चीफ़ को कहना पड़ा कि सेना मे असहिष्णुता नामक बीमारी अभी तक लगी नही है !


तनिक विचार कीजिए कि कहीं अगर सेना मे धार्मिक असहिष्णुता गई तो क्या हो सकता है ? क्या इस कथित असहिष्णुता से पहले सेना ने कहीं भी रेस्कयु ओपरेशन नहीं किया जाति-धर्म, उम्र, लिंग भेद किए बिना देश की सेना ने हर आपदा , चाहे वह देश की सीमा पर आई हो या देश की सीमा के भीतर, उम्मीद से बढ़कर लोगों की सेवा की अपनी जान भी देकर ! उत्तराखंड मे केदारनाथमे आई बाढ़मे सेना औरएन डी आरएफ के कईजवान शहीद होगये ! क्या इन क्षुद्र पत्रकारों को अभी भी इनकी निष्ठा पर कोई शक है !


दूसरी घटना भी चेन्नई बाढ़ से ही संबंधित है ! देश की राष्ट्रीय मीडीया अपने चैनलों पर बढ़ की रिपोर्टिंग तो कर रहे हैं , मगर जनता को गुमराह भी कर रहे हैं , वास्तविक स्थिति को दिखाने के बजाय TRP बढ़ाने  का खेल खेल रही हैं ! चेन्नई की वास्तविकता दिखाने के बजाय शिकागो मे आई बाढ़ की तस्वीरें दिखा रहे हैं ! बैंगलोर एवियेशन को बयान जारी करके यह कहना पड़ा की देख की मेन स्ट्रीम की मीडीया खिलवाड़ कर रही है लोगों की भावनाओं के साथ !




ऐसे कृत्यों से वे अपनी विश्वसनीयता समाप्त नहीं कर रहे ! विचार ज़रूर कीजिएगा !!!

बुधवार, 25 नवंबर 2015

मेरी नज़र से : आपको भी अपनी गिरेबान मे झाँकना चाहिए लश्कर-ए-मीडिय...

मेरी नज़र से : आपको भी अपनी गिरेबान मे झाँकना चाहिए लश्कर-ए-मीडिय...: NBT के ब्लॉगर श्री दुष्यंत कुमार का ब्लॉग पढ़ा " पश्चिम अपना ग़रेबा देखे , मुस्लिम कमियाँ   " ! अपनी बात रखने से ...

आपको भी अपनी गिरेबान मे झाँकना चाहिए लश्कर-ए-मीडिया

NBT के ब्लॉगर श्री दुष्यंत कुमार का ब्लॉग पढ़ा "पश्चिम अपना ग़रेबा देखे, मुस्लिम कमियाँ " ! अपनी बात रखने से पहले कबीर जी का एक दोहा लिखना चाहता हूँ :
बुरा जो देखन मैं चला , बुरा ना मिलिया कोय !

जो दिल ढूँढा आपना . मुझसा बुरा ना कोय !!


बस इतनी सी ही बात है कि हमलोग हमेशा ही दूसरों के दोषों पर नज़र रखे हुए रहते हैं जबकि अपनी कमियाँ तो उससे भी भयानक है ! पिछले 4 दिनों मे देश की केंद्रीय कैबिनेट ने कई सुधारवादी कदम उठाए लेकिन उसकी जानकारी मीडीया ने नहीं दी, ना ही यह ही बताया कि इन सुधारों मे क्या कमी रह गई जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए , लेकिन ऐसा भी नहीं की मीडीया मे कोई बहस नही हुई, बहस हुई इस बात को लेकर कि जेम्स बॉन्ड को संस्कारी क्यों बनाया गया , आख़िर चुम्मा को छोटा क्यों किया गया, वह भारत मे ऐस-होल नहीं बोल सकता ! आख़िर कोई भद्र्जन यह बताएगा कि इस बहस से आम आदमी की जिंदगी मे क्या फ़र्क पड़ने वाला है !

NBT के 3 ब्लॉगर लगातार, नीरेंद्र नागर, भारत सिंह और दुष्यंत सिंह अख़लाक़ के मुद्दे पर लिखते रहे, लेकिन सच्चाई को उजागर करती हुई यह रिपोर्ट देखिए और बताइए कि मीडिया की यह बेशर्मी को बर्दाश्त किया जा सकता है क्या ? ‘The DadriTruth: A Personal Grudge Twisted Into a Communal Killing” 

सूनपेड़ फरीदाबाद मे जो घटना घटी थी वह भी व्यक्तिगत लड़ाई थी मगर केजरी-राहुल-वृंदा के साथ साथ देश की लश्कर-ए-मीडीया ने उस घटना को सीधे सीधे सवर्ण-दलित की लड़ाई बनाने पर पिली हुई थी ! DNA की यह रिपोर्ट  देख सकते हैं !


जहाँ तक सहनशीलता की बात है तो  क्या इस बात को भी सह लें जो आज़म ख़ान ने कहा, जो मणिशंकर अय्यर भारत के खिलाफ पाकिस्तान को षड्यंत्र के लिए उकसा रहे थे , या फिर खुर्शीद आलम के उस बयान से सहमत हो जाएँ जो नवाज शरीफ को शन्ति दूत करार दे रहे थे जबकि दो जिंदा आतंकवादी अभी भी भारत के कब्ज़े मे हैं और सीमा पर रोजाना सैनिक शाहिद हो रहे हैं और आतंकवादी मारे जा रहे हैं ! इन कॉंग्रेसी नेताओं के बयान के खिलाफ कोई ब्लॉगर जगा , नहीं ! तो हम यह क्यों ना मान लूँ कि ये सारे लश्कर-ए-मीडिया हाउस कॉंग्रेस से मिले हुए हैं और कॉंग्रेस पाकिस्तान से , नहीं तो क्या जैसे वर्तमान सरकार छोटा राजन को गिरफ्तार कर के ले आई और दाऊद के लिए प्रयास कर रही है, क्या पिछली सरकारों ने भी ईमानदारी से प्रयास किए ! आख़िर मीडीया को हर बात को इतना ट्विस्ट करने मे क्या मज़ा आता है !

जहर कौन फैला रहा है :-
किसी भी सभ्य समाज मे किसी भी  प्रकार के दंगे होने ही नही चाहिए ! धर्म निरपेक्षता का मतलब क्या है सरकार के लिए? शायद सभी धर्मों से दूरी, और क़ानून बनाते समय उस पर किसी भी धर्म के प्रभाव को ना दिखने देना  ! लेकिन इसका ये कभी भी मतलब नहीं हो सकता "तुष्टिकरणक्योंकि सहबानों केस के बारे मे लिखने का कोई मतलब नहीं है , की कैसे देश के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को मुल्लों-मौलवियों के दबाव मे आकर बदल दिया ! सब्सिडी के नाम पर हज यात्रा, यह कौन सी धर्म निरपेक्षता है , वोट बैंक वाली !

मीडीया की रिपोर्टिंग भी (अ)धर्म निरपेक्ष है :-
मैं यहाँ पर मीडीया की धर्म निरपेक्षता और पार्टी निरपेक्षता के कुछ अंश दे रहा हूँ ! ऐसे दंगे, जहाँ पर लोग मरे हैं उनकी रिपोर्टिंग :यदि हिंदू पीड़ित है तो रिपोर्ट होगी : दो समुदायों के बीच झड़प ; और यदि पीड़ित कोई मुस्लिम है तो रिपोर्टिंग होगी : हिंदुओं ने मुस्लिमो को मारा/ पीटा
BBC HINDIA ,NBT, NDTV, ABP NEW (See Pics at Last)



हिंदुओं के विरुद्ध मुस्लिमों की किसी भी घटना की ऐसी रिपोर्टिंग ढूढ़ने के बावजूद नहीं मिली ! अगर आपको अब भी लगता है कि देश का कोई भी नागरिक , कोई भी समाज सेवक, पत्रकार, बुद्धिजीवी , मीडीया ये निष्पक्ष हैं , तो फिर  …. ……. कुछ भी नही हो सकता !               इन तथाकथित बुद्धिजीवियों की हक़ीकत बयाँ करती  तुफैल अहमद  का  यह लेख भी देखें !



जीतने साहित्यकार और नेता अभिनेता बुद्धिजीवी जो की असहिष्णुता का राग अलाप रहे हैं इनकी सिर्फ़ एक समस्या है , जब तक मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं इस सभी को कभी भी चैन नही आएगा ! अभिनेत्री रवीना टंडन ने अपने ट्विटर पर एक लिंक शेयर किया था जिसमे उन सभी लोगों का नाम है जो नही चाहते थे कि मोदी को वीज़ा मिले ! उनमे से आमिर ख़ान का नाम सबसे उपर है !


आपका क्या विचार है ये आपको तय करना है ! क्योंकि लश्कर--मीडीया और सेकुलरों ने पहले ही अपना पक्ष तय कर लिया है !