गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

पत्रकारों कितना नीचे गिरोगे भाई !

24x7 चैनलों के हो जाने से खबरों का अकाल पद गया है, उन्हें समझ मे ही नही आता की दिन भर के खुली हुई दुकान पर क्या क्या दिखाएँ ! तोते उड़ाना, कौवा लड़ाना, किसी बयान को तोड़ मरोड़ कर लंबा खींच देना , अर्थ का अनर्थ बना देना !


लेकिन आज जो किया वह बहुत ही असंवेदनशील था ! चेन्नई बाढ़ मे फँसे लोगों तक सहायता पहुँचा रहे नेवी के ऑफिसर्स की निष्ठा पर ही सवाल उठा दिया, एक पत्रकार ने नेवी चीफ़ से ही पूछ दिया नेवी में भी 'असहिष्णुता' फील हो रही है कि नहीं ! इसके उत्तर मे नेवी चीफ़ को कहना पड़ा कि सेना मे असहिष्णुता नामक बीमारी अभी तक लगी नही है !


तनिक विचार कीजिए कि कहीं अगर सेना मे धार्मिक असहिष्णुता गई तो क्या हो सकता है ? क्या इस कथित असहिष्णुता से पहले सेना ने कहीं भी रेस्कयु ओपरेशन नहीं किया जाति-धर्म, उम्र, लिंग भेद किए बिना देश की सेना ने हर आपदा , चाहे वह देश की सीमा पर आई हो या देश की सीमा के भीतर, उम्मीद से बढ़कर लोगों की सेवा की अपनी जान भी देकर ! उत्तराखंड मे केदारनाथमे आई बाढ़मे सेना औरएन डी आरएफ के कईजवान शहीद होगये ! क्या इन क्षुद्र पत्रकारों को अभी भी इनकी निष्ठा पर कोई शक है !


दूसरी घटना भी चेन्नई बाढ़ से ही संबंधित है ! देश की राष्ट्रीय मीडीया अपने चैनलों पर बढ़ की रिपोर्टिंग तो कर रहे हैं , मगर जनता को गुमराह भी कर रहे हैं , वास्तविक स्थिति को दिखाने के बजाय TRP बढ़ाने  का खेल खेल रही हैं ! चेन्नई की वास्तविकता दिखाने के बजाय शिकागो मे आई बाढ़ की तस्वीरें दिखा रहे हैं ! बैंगलोर एवियेशन को बयान जारी करके यह कहना पड़ा की देख की मेन स्ट्रीम की मीडीया खिलवाड़ कर रही है लोगों की भावनाओं के साथ !




ऐसे कृत्यों से वे अपनी विश्वसनीयता समाप्त नहीं कर रहे ! विचार ज़रूर कीजिएगा !!!

बुधवार, 25 नवंबर 2015

मेरी नज़र से : आपको भी अपनी गिरेबान मे झाँकना चाहिए लश्कर-ए-मीडिय...

मेरी नज़र से : आपको भी अपनी गिरेबान मे झाँकना चाहिए लश्कर-ए-मीडिय...: NBT के ब्लॉगर श्री दुष्यंत कुमार का ब्लॉग पढ़ा " पश्चिम अपना ग़रेबा देखे , मुस्लिम कमियाँ   " ! अपनी बात रखने से ...

आपको भी अपनी गिरेबान मे झाँकना चाहिए लश्कर-ए-मीडिया

NBT के ब्लॉगर श्री दुष्यंत कुमार का ब्लॉग पढ़ा "पश्चिम अपना ग़रेबा देखे, मुस्लिम कमियाँ " ! अपनी बात रखने से पहले कबीर जी का एक दोहा लिखना चाहता हूँ :
बुरा जो देखन मैं चला , बुरा ना मिलिया कोय !

जो दिल ढूँढा आपना . मुझसा बुरा ना कोय !!


बस इतनी सी ही बात है कि हमलोग हमेशा ही दूसरों के दोषों पर नज़र रखे हुए रहते हैं जबकि अपनी कमियाँ तो उससे भी भयानक है ! पिछले 4 दिनों मे देश की केंद्रीय कैबिनेट ने कई सुधारवादी कदम उठाए लेकिन उसकी जानकारी मीडीया ने नहीं दी, ना ही यह ही बताया कि इन सुधारों मे क्या कमी रह गई जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए , लेकिन ऐसा भी नहीं की मीडीया मे कोई बहस नही हुई, बहस हुई इस बात को लेकर कि जेम्स बॉन्ड को संस्कारी क्यों बनाया गया , आख़िर चुम्मा को छोटा क्यों किया गया, वह भारत मे ऐस-होल नहीं बोल सकता ! आख़िर कोई भद्र्जन यह बताएगा कि इस बहस से आम आदमी की जिंदगी मे क्या फ़र्क पड़ने वाला है !

NBT के 3 ब्लॉगर लगातार, नीरेंद्र नागर, भारत सिंह और दुष्यंत सिंह अख़लाक़ के मुद्दे पर लिखते रहे, लेकिन सच्चाई को उजागर करती हुई यह रिपोर्ट देखिए और बताइए कि मीडिया की यह बेशर्मी को बर्दाश्त किया जा सकता है क्या ? ‘The DadriTruth: A Personal Grudge Twisted Into a Communal Killing” 

सूनपेड़ फरीदाबाद मे जो घटना घटी थी वह भी व्यक्तिगत लड़ाई थी मगर केजरी-राहुल-वृंदा के साथ साथ देश की लश्कर-ए-मीडीया ने उस घटना को सीधे सीधे सवर्ण-दलित की लड़ाई बनाने पर पिली हुई थी ! DNA की यह रिपोर्ट  देख सकते हैं !


जहाँ तक सहनशीलता की बात है तो  क्या इस बात को भी सह लें जो आज़म ख़ान ने कहा, जो मणिशंकर अय्यर भारत के खिलाफ पाकिस्तान को षड्यंत्र के लिए उकसा रहे थे , या फिर खुर्शीद आलम के उस बयान से सहमत हो जाएँ जो नवाज शरीफ को शन्ति दूत करार दे रहे थे जबकि दो जिंदा आतंकवादी अभी भी भारत के कब्ज़े मे हैं और सीमा पर रोजाना सैनिक शाहिद हो रहे हैं और आतंकवादी मारे जा रहे हैं ! इन कॉंग्रेसी नेताओं के बयान के खिलाफ कोई ब्लॉगर जगा , नहीं ! तो हम यह क्यों ना मान लूँ कि ये सारे लश्कर-ए-मीडिया हाउस कॉंग्रेस से मिले हुए हैं और कॉंग्रेस पाकिस्तान से , नहीं तो क्या जैसे वर्तमान सरकार छोटा राजन को गिरफ्तार कर के ले आई और दाऊद के लिए प्रयास कर रही है, क्या पिछली सरकारों ने भी ईमानदारी से प्रयास किए ! आख़िर मीडीया को हर बात को इतना ट्विस्ट करने मे क्या मज़ा आता है !

जहर कौन फैला रहा है :-
किसी भी सभ्य समाज मे किसी भी  प्रकार के दंगे होने ही नही चाहिए ! धर्म निरपेक्षता का मतलब क्या है सरकार के लिए? शायद सभी धर्मों से दूरी, और क़ानून बनाते समय उस पर किसी भी धर्म के प्रभाव को ना दिखने देना  ! लेकिन इसका ये कभी भी मतलब नहीं हो सकता "तुष्टिकरणक्योंकि सहबानों केस के बारे मे लिखने का कोई मतलब नहीं है , की कैसे देश के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को मुल्लों-मौलवियों के दबाव मे आकर बदल दिया ! सब्सिडी के नाम पर हज यात्रा, यह कौन सी धर्म निरपेक्षता है , वोट बैंक वाली !

मीडीया की रिपोर्टिंग भी (अ)धर्म निरपेक्ष है :-
मैं यहाँ पर मीडीया की धर्म निरपेक्षता और पार्टी निरपेक्षता के कुछ अंश दे रहा हूँ ! ऐसे दंगे, जहाँ पर लोग मरे हैं उनकी रिपोर्टिंग :यदि हिंदू पीड़ित है तो रिपोर्ट होगी : दो समुदायों के बीच झड़प ; और यदि पीड़ित कोई मुस्लिम है तो रिपोर्टिंग होगी : हिंदुओं ने मुस्लिमो को मारा/ पीटा
BBC HINDIA ,NBT, NDTV, ABP NEW (See Pics at Last)



हिंदुओं के विरुद्ध मुस्लिमों की किसी भी घटना की ऐसी रिपोर्टिंग ढूढ़ने के बावजूद नहीं मिली ! अगर आपको अब भी लगता है कि देश का कोई भी नागरिक , कोई भी समाज सेवक, पत्रकार, बुद्धिजीवी , मीडीया ये निष्पक्ष हैं , तो फिर  …. ……. कुछ भी नही हो सकता !               इन तथाकथित बुद्धिजीवियों की हक़ीकत बयाँ करती  तुफैल अहमद  का  यह लेख भी देखें !



जीतने साहित्यकार और नेता अभिनेता बुद्धिजीवी जो की असहिष्णुता का राग अलाप रहे हैं इनकी सिर्फ़ एक समस्या है , जब तक मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं इस सभी को कभी भी चैन नही आएगा ! अभिनेत्री रवीना टंडन ने अपने ट्विटर पर एक लिंक शेयर किया था जिसमे उन सभी लोगों का नाम है जो नही चाहते थे कि मोदी को वीज़ा मिले ! उनमे से आमिर ख़ान का नाम सबसे उपर है !


आपका क्या विचार है ये आपको तय करना है ! क्योंकि लश्कर--मीडीया और सेकुलरों ने पहले ही अपना पक्ष तय कर लिया है !


















शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

अवॉर्ड वापसी को सपोर्ट तो करूं, लेकिन...

मैं सोच रहा था कि मोदी सरकार के खिलाफ असहिष्णुता के मामले मे  AWARD WAPASY CAMPAIGN को दिल से सपोर्ट करूँ ! लेकिन क्या करूँ , अभी तक सिर्फ़ उन्हीं लोगों ने ही इसको अपना समर्थन किया है जो लोग वामपंथ और कॉंग्रेस की विचारधारा के समर्थक कवि, लेखक, इतिहासकार एवं फिल्मकार हैं ! इसका सिलसिला मोदी के सत्ता मे आने के बाद से ही शुरू हो गया था और जहाँ तक मुझे याद है कि "लीला सैमसन जी" (https://en.wikipedia.org/wiki/Leela_Samson#Controversy) ने इसकी शुरुआत की थी, जो अब एक एक करके साहित्यकार , फिल्मकार और इतिहासकारों तक पहुँच गया !

कुछ लोग कहते हैं कि लीला सैमसान समेत इनमे से कई ऐसे लोग थे जो किसी ना किसी संस्था मे उँचे ओहदों पर बैठे थे और सरकार बदलने के बाद जब इन्हे यह अहसाह हुआ कि जब राज्यपाल तक बदल दिए गये तो फिर वो क्या हैं , उन्हे भी हटा दिया जाएगा ! इसलिए कि सरकार हटाए इससे पहले खुद ही शहीद हो गये ! और अब, यदि ये लोग यह समझ रहे हैं कि इनके ऐसा करने से जान मानस मे सरकार के प्रति कोई नकारात्मक बदलाव आएगा तो ये इनकी ग़लतफहमी है ! सब जानते हैं कि इनका अजेंडा कॉंग्रेस और वामपंथियों से भिन्न नहीं है !

लेकिन इनके अभियान को धार तब मिलती जब स्वयं इनके वैचारिक आका लोग जो अभी भी संसद (लोकसभा या राज्यसभा ) , विधायक  या कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा जमाए बैठे हैं , उन्हे भी अपने अपने पदों से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए , और उन नेताओं को भी जिन्होने खुद स्वयं को स्वधन्य्मान कर भारत रत्न घोषित किया ! उनके अनुयायियों को भी वे अवॉर्ड वापस कर देने चाहिए !

इन लोगों की एक और शिकायत थी कि मोदी इंटरनेट की आज़ादी पर भी ग्रहण लगा रहे हैं , लेकिन ठीक इसके उलट, एक स्वतंत्र संस्था की रिसर्च यह कहती है की मोदी सरकार मे इंटरनेट की आज़ादी और अधिक इंप्रूव हुई है ! आप नीचे दिए हुए लिंक पर जाकर चेक कर सकते हैं ! (Report from “The Week”) http://www.theweek.in/news/biz-tech/internet-freedom-in-india-improved-under-modi-government.html

जब ऐसा है तो फिर विरोध क्यों ? सिर्फ़ विरोध के लिए ? वो तो वैसे भी गैर NDA नीत दल कर ही रहे हैं ! मुझे लगता है कि इसको समझने के लिए DAVID B COHEN का यह ट्वीट ही काफ़ी है।



शनिवार, 24 अक्टूबर 2015

मैं सब कुछ ठीक कर सकता हूँ

मैं सब कुछ ठीक कर सकता हूँ

जैसा की आप सबको पता है कि मेरे पास कुछ मायावी शक्तियाँ हैं जिनसे मैं सब कुछ ठीक कर सकता हूँ ! और ये मेरा कोई वादा नही बल्कि दावा है ! अभी मेरे हाथ मे कोई शक्ति (संवैधानिक) नहीं है इस लिए देश और दिल्ली के लिए कुछ नहीं कर सकता सिवाय दोषारोपण के ! देखों ना , देश मोदी के हाथ मे , एल जी मोदी के हाथ मे , दिल्ली पुलिस मोदी के हाथ मे ,  भाजपा और आर एस एस मोदी के हाथ मे, हिंदू संगठन मोदी के हाथ में ! मेरे हाथ मे क्या है , कुछ भी नहीं, यहाँ तक कि मेरी सरकार का एक भी मंत्रालय मेरे हाथ मे नहीं ! तो आख़िर मैं करूँ तो क्या करूँ और कैसे करूँ ! मैं बिल्कुल खाली हूँ ! मेरे हाथ मे केवल दो चीज़ें हैं , एक मेरी पार्टी और दूसरा मेरा मोबाइल ! मोबाइल से ट्वीट और री -ट्वीट करता हूँ और पार्टी मे सुधार के प्रयोग !
Geograpgy Mid Term Exam Paper of 12 Class in Delhi 
हाँ , तो मैं कह रहा था कि मैं सब कुछ ठीक कर सकता हूँ, आपने तो देखा ही होगा , सबसे पहले मैने अपनी पार्टी को ठीक किया , पार्टी के लोगों को ठीक किया , यहाँ तक कि मैने उनको भी नहीं बख्शा जो मेरे साथ पार्टी बनाते समय थे , जिन्होने मुझे क़ानूनी सलाह दी, धन दिया ! एक ही झटके मे दूध मे गिरी मक्खी की तरह निकल कर बाहर कर दिया , ट्रांसपैरेंसी की बात कर गंदगी फैला रहे थे पार्टी में ! इनको तो छोड़ो अपने लोकपाल और लोकपाल की वकालत करने वाले को भी ....... कर दिया

Geograpgy Mid Term Exam Paper of 12 Class in Delhi 
खैर छोड़ो , दूसरे सुधारों की बात करते हैं , अभी देखो हमारी सरकार , जो आपकी सरकार है यानी की दिल्ली की सरकार ने, भूगोल विषय जो की शिक्षा मंत्रालय मे अंतर्गत यानी की अपने सिसोदिया भाई के अंतर्गत आती है, मे सुधार हुआ है ! लेकिन इस सुधार को किसी चैनल वालों ने नहीं दिखाया , क्योंकि मीडिया को मोदी ने खरीद रखा है, और सांप्रदायिकता के शोर तले इस ऐतिहासिक खबर को दबा दिया , ठीक उसी तरह जैसे मेरे हर फ़ैसले को एल जी साहब दबा देते हैं ! आपकी सरकार ने जो बदलाव लाए हैं वो 1947 से लेकर आजतक ना तो पाकिस्तान कोई जनरल कर पाया है, ना ही भारत का कोई नेता ! अब मैं अपने मुँह से अपने सरकार की कितनी बड़ाई करूँ , आप स्वयं देख लीजिए ! और कल्पना कीजिए की मैं अगर प्रधानमंत्री बन गया तो क्या क्या बदलाव ला सकता हूँ ! मीडीया की बेरूख़ी तो देखिए ऐसा ही कुछ परिवर्तन ऑर्गनाइज़र ने कुछ दिनों पहले ग़लती से कर दिया था तो उसपर उस शाम हर चैनल वाले डिबेट करवा रहे थे , और हमको भाव ही नहीं दिया ! हैं .... करमजली मीडीया .....
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